गुस्ताखियां

बे-परवाह गुस्ताखियां किये जा रहा हूं
इस जिंदगी को बस यूं ही जिये जा रहा हूं
गुमों के लबरेज़ होते पियालों को पिये जा रहा हूं
हर घड़ी कतरे कतरे को ये पैगाम दिए जा रहा हूं
कुछ नए सपने संजोय जा रहा हूं
लैबों से निकली बातों को पन्नो पर कुछ इस कदर पिरोए जा रहा हूं
पालकों को नम करके खुशी से आज यूं अपनी जिंदगी तेरे नाम पर किए जा रहा हूं
क्यूंकि
तुम्हें अंदाज़ा ही कहां के कितने अपने हैं ये गमों के साये
जो हर रात हमें अपनी बाहों में ले लेते हैं
जो मुझे मुझसा कर देते हैं
हर पल में तुझसे अलग होने का एहसास दे देते हैं
यादों को नई जिंदगी और
हर पल मुझे अपनी बाहों में भर लेते हैं
तुझे अंदाज़ा कहाँ
के ये गमों के साए हर दिन एक नई कहानी ले आते हैं
कुछ कोहरे पन्नो पर और कुछ दिल पर लिख जाते हैं
तुझे कहाँ अंदाज़ा कि क्या शिद्दत है इनमे
मेरे गमों के लिए जो हर घड़ी मेरे साए में रह लेते हैं
हर पल साथ ले चलते हैं
कभी-कभी गुफ्त-ए-गु कर लेते हैं
तो कभी आंखें भर देते हैं
बस इसिलिए आज फिर यूं
बे-परवाह गुस्ताखियां किये जा रहा हूं
इस जिंदगी को बस यूं ही जिये जा रहा हूं
-गिलक्रिस्ट प्रेम

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