अच्छा तो मैं चलता हूं

अजीब सि है ये जिंदगी
 कभी भीड़ में हंसा देती है तो
 कभी अकेले में रूला देता है
 कभी महफिलों में अकेला सा कर देती है तो
 रातों को खुश-नुमा सा
 कभी जुल्फ़ों का अंधेरा होता है तो
 कभी रातों का साया
 कभी आखों में चमक होती है तो
 कभी पालकों पर नमी
 कभी चेहरे पर रौनक होती है तो
 कभी गुमों का एहसास
 कभी आखों में दुनिया होती है तो
 कभी सिर्फ अंधेरा ही अंधेरा
 कभी हाथों को पकड़ने के वादे होते हैं तो
 कभी हाथ छुड़ाने की कोशीशें
 कभी साथ चलने की बातें होती हैं तो
 कभी चार कदम भी मुश्किल लगने लगते हैं
 कभी जिंदगी रुक सी जाती है तो कभी
 बोहत तेज भगने लगती है
 कभी रूह से रूह का ताल्लुक होता है तो
 कभी अंजनों से बातें
 कभी खुशी का एहसास होता है तो
 कभी गम का सागर सहलाब सा ले आता है
 कभी दोस्ती में गलियां होती हैं
 तो कभी कुछ अनकहे वादे
 कभी सात जन्म तक का साथ होता है तो
 कभी एक अरसा भी साथ गुजरना मुश्किल
 कभी बांहों में आराम होता है तो
 कभी उन्हीं बांहों में घुटन
 कभी जन्नत सी लगती है ये दुनिया भी
 तो कभी नरक से भी बत्तर
 अजीब सि है ये जिंदगी
 कभी भीड़ में हंसा देती है तो
 कभी अकेले में रूला देता है
 ये ज़िंदगी
 -गिलक्रिस्ट प्रेम

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