यारियां

वो यादें वो बातें वो किस्से पुराने से
कभी तो ले आओ मेरे यारों के दिए हुए पल सुहाने से
कोई तो लिखो ख़त जिस्को बार बार मैं पढूं
कोई तो लिखो ग़ज़ल जिस्की मैं नुमायिश करु
कोई तो लाओ वो फालतू की बातें करने के लिए वक्त
कुछ तो दे जाओ जिसके लिए खुदा से मैं गुजारिश करु
जिंदगी जैसे एक पल में सारी खुशियां दे गई
तुम मिले तो जैसे जीने को वजाह दे गई
कुछ तो दे जाओ वो पल पुराने से
किससे भी होने चाहिए जिनको कट जाए बूढ़ापा सुनाने से
ले आओ मेरे यार वो पल सुहाने से
जब न चिंता थी न फ़िक्र कल की
हर सुबह लाति नई यादें हर पल की
जो हुआ उसे भूल सब मिट्टी पाओ
जनाब कोई ज़रा जा कर मेरे दोस्त ले आओ
वो कम पैसों में केई खुशियां खरीद देते थे
और मुश्किल एक पर आए तो किसी से भी दुश्मनी मोल ले लेते थे
वो बेज्जती करके भी हंसाते थे
वो हर दिन मेरे दोस्त होने का फ़र्ज़ निभाते थे
खून का रिश्ता नहीं था कोई उनसे
मगर खून से ज़्यादा सगे मेरे वो कहते थे
कोई तो ले आओ वो यार मेरे जो पल सुहाने थे
कम पैसे में भी वो केई सारी खुशियां खरीद लेट थे
 -गिलक्रिस्ट प्रेम

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